Varanasi Fire: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शनिवार शाम श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित सप्तऋषि आरती के दौरान आत्म विश्वेश्वर महादेव मंदिर में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में सात लोग झुलस गए, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस और प्रशासन ने बताया कि सभी घायलों की हालत अब खतरे से बाहर है और उनका इलाज चल रहा है। समय रहते लोगों को बाहर निकालने और दमकल व पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़ी त्रासदी टल गई।
Varanasi Fire: रूई से बनी सजावट बनी आग का कारण
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस वर्ष मंदिर को विशेष रूप से अमरनाथ गुफा के प्रतीक के रूप में सजाया गया था। मंदिर के आंतरिक हिस्से को रूई और सजावटी सामग्री से ढका गया था, जिससे प्राकृतिक गुफा का आभास हो सके। रात करीब 8 बजे, जैसे ही आरती शुरू हुई, पूजा स्थल के पास लगी सजावटी रूई में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग तेजी से फैल गई और कुछ ही पलों में माहौल धुएं से भर गया।
Varanasi Fire: 30 से अधिक लोग मौजूद थे मंदिर में
हादसे के समय मंदिर में पुजारी समेत लगभग 30 श्रद्धालु मौजूद थे। आग फैलते ही लोग जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे। इसी दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और कई लोग सीधे आग या गरम धुएं के संपर्क में आने से झुलस गए। स्थानीय लोगों और मंदिर समिति के सदस्यों ने तुरंत श्रद्धालुओं को बाहर निकाला और घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
Varanasi Fire: प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाया मंजर
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, सावन की पूर्णिमा पर यहां विशेष आरती होती है। इस बार मंदिर को अमरनाथ गुफा की तरह सजाया गया था। लेकिन जैसे ही आरती शुरू हुई, रूई में आग लग गई और वो तेजी से फैल गई। लोग घबराकर बाहर भागने लगे, जिससे कुछ लोग गिर पड़े और झुलस गए।
दमकल और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
आग लगने की सूचना मिलते ही चौक थाने की पुलिस टीम और दमकल विभाग की एक मोटर बाइक-आधारित फायर यूनिट मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों ने भी जलती हुई रूई पर पानी डालकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। दमकल कर्मियों ने आग को नियंत्रित किया और आसपास के इलाके को सुरक्षित किया।
घायलों का इलाज जारी
रात 9:40 बजे तक सभी झुलसे हुए लोगों को वाराणसी के कबीर चौराहा स्थित मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि घायलों में दो से तीन बच्चे भी हैं, जिनके शरीर पर हल्के से मध्यम स्तर के जलने के निशान हैं। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि सभी मरीज खतरे से बाहर हैं और उनकी देखभाल में कोई कमी नहीं रखी जा रही है।
प्रशासन ने किया निरीक्षण
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
पुलिस ने बताया कि हादसे की वजह से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह गंभीर लापरवाही का मामला है। सजावट में ज्वलनशील सामग्री का प्रयोग और सुरक्षा उपायों की कमी को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन ने धार्मिक आयोजनों के दौरान ज्वलनशील सामग्री के उपयोग पर रोक लगाने और आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम करने की अपील की है। स्थानीय लोगों ने भी मांग की कि मंदिरों में इस तरह की सजावट के समय फायर सेफ्टी उपकरण और अग्निशमन दल की मौजूदगी अनिवार्य हो।
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