Road Accident: बिहार के भागलपुर जिले के शाहकुंड थाना क्षेत्र में रविवार देर रात एक दुखद हादसे ने सभी को झकझोर दिया। सुल्तानगंज से ज्येष्ठगौर नाथ मंदिर जल चढ़ाने जा रही कांवड़ियों की डीजे वैन पानी से भरे गड्ढे में पलट गई, जिसमें 5 कांवड़ियों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को शाहकुंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
Road Accident: हादसे का कारण, बिजली का तार और कीचड़
यह हादसा रविवार रात करीब 12:15 बजे शाहकुंड-भागलपुर मुख्य मार्ग पर बेलथू महतो स्थान के पास हुआ। जानकारी के अनुसार, पिकअप वैन पर छोटा डीजे सेट लगा था, जिसमें 9 कांवड़िए सवार थे। सभी सुल्तानगंज में गंगा स्नान के बाद ज्येष्ठगौर नाथ मंदिर जल चढ़ाने जा रहे थे। बारिश के कारण सड़क पर पानी और कीचड़ जमा था, जिससे वैन का पहिया फिसला। हादसे में वैन बिजली के तार से टकराई, जिसके कारण वह अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। गड्ढे में पानी भरा होने के कारण वैन के नीचे दबने से 5 कांवड़ियों की मौत हो गई।
Road Accident: मृतकों और घायलों की पहचान
मृतकों की पहचान संतोष कुमार (18), मनोज कुमार (24), विक्रम कुमार (23), अंकुश कुमार (18), और रवीश कुमार उर्फ मुन्ना (18) के रूप में हुई है। ये सभी शाहकुंड के पास खेरई गांव के रहने वाले थे। हादसे में बचे पिंटू कुमार ने बताया कि बारिश के कारण सड़क पर कीचड़ था, और वैन बिजली के तार से टकराने के बाद अनियंत्रित हो गई। पांच कांवड़ियों ने वैन से कूदकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन तीन की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों का इलाज शाहकुंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है, और डॉक्टरों ने उनकी स्थिति नाजुक बताई है।
Road Accident: पुलिस और प्रशासन का त्वरित कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही शाहकुंड थाने की पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारी मंजीत कुमार ने बताया कि गड्ढे से वैन को निकालकर सभी घायलों और मृतकों को अस्पताल पहुंचाया गया। डीएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) नवनीत कुमार ने कहा कि हादसे की जांच शुरू कर दी गई है, और प्रारंभिक जानकारी में कीचड़ और बिजली के तार से टकराव को हादसे का कारण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिजनों में मातम, गांव में शोक
हादसे की खबर सुनते ही मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया। खेरई गांव में शोक की लहर दौड़ गई, और परिजन अस्पताल पहुंचकर अपने प्रियजनों के शवों से लिपटकर रोते रहे। कांवड़ियों का उत्साह और भक्ति से भरा यह सफर एक त्रासदी में बदल गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि सावन के पवित्र महीने में यह हादसा सभी के लिए दुखद है।
कांवड़ यात्रा में हादसों का सिलसिला
यह हादसा कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं की श्रृंखला में एक और कड़ी है। इससे पहले 29 जुलाई को झारखंड के देवघर में कांवड़ियों से भरी बस और गैस सिलेंडर लदे ट्रक की टक्कर में 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, और 21 घायल हुए थे। इसी तरह उत्तर प्रदेश, हरियाणा, और अन्य राज्यों में भी कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क हादसों में कई श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। इन हादसों ने सड़क सुरक्षा और कांवड़ यात्रा के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।
सड़क सुरक्षा पर सवाल
शाहकुंड से सुल्तानगंज जाने वाली सड़क संकरी है, और बारिश के कारण कई जगह पानी और कीचड़ जमा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क की खराब स्थिति और बिजली के तारों की लचर व्यवस्था ने इस हादसे को और घातक बना दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन को सड़क सुरक्षा, बिजली के तारों की मरम्मत, और ट्रैफिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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