Kulgam Encounter: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के अखाल इलाके में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान आज नौवें दिन भी जारी है। बीती रात से लेकर सुबह तक इलाके में भारी गोलीबारी और धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं। सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने घने जंगल और पहाड़ी इलाके का फायदा उठाते हुए सुरक्षा बलों पर लगातार फायरिंग की। इस दौरान सेना के दो जवान शहीद हो गए, जबकि पिछली रात की मुठभेड़ में दो अन्य जवान घायल हुए थे।
Kulgam Encounter: अब तक दो जवान शहीद, दस घायल
पिछले नौ दिनों में चल रहे इस ऑपरेशन में अब तक दो जवान शहीद हो चुके हैं और दस जवान घायल हो चुके हैं। घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। सेना और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।
Kulgam Encounter: एक आतंकी का शव बरामद, बाकी अब भी फरार
सुरक्षा बलों ने अब तक मुठभेड़ स्थल से एक आतंकी का शव बरामद किया है। हालांकि, खुफिया इनपुट के अनुसार, इलाके में अभी भी कम से कम तीन या उससे अधिक आतंकी छिपे हुए हैं। बताया जा रहा है कि ये आतंकी प्राकृतिक गुफाओं और जंगलों में बने ठिकानों में छिपे हुए हैं, जिससे उन्हें ढूंढना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
दशकों का सबसे लंबा आतंक विरोधी अभियान
कुलगाम का यह अभियान जम्मू-कश्मीर में पिछले कई दशकों का सबसे लंबा चलने वाला आतंक विरोधी ऑपरेशन बन गया है। आमतौर पर इस तरह के ऑपरेशन कुछ घंटों से लेकर दो-तीन दिन में समाप्त हो जाते हैं, लेकिन इस बार इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों, घने जंगल और गुफाओं के कारण अभियान खिंचता चला गया है।
इलाके में कड़ी सुरक्षा, आम लोगों को दूर रखा गया
मुठभेड़ स्थल के चारों ओर सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने कड़ा सुरक्षा घेरा बना रखा है। किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए आम लोगों को इलाके में जाने से रोका गया है। ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से इलाके की निगरानी की जा रही है।
आतंकी समूह की पहचान पर काम जारी
सुरक्षा एजेंसियां अभी इस बात की जांच कर रही हैं कि मुठभेड़ में शामिल आतंकी किस संगठन से जुड़े हुए हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ये आतंकी पाकिस्तान से घुसपैठ कर घाटी में पहुंचे थे और किसी बड़े हमले की योजना बना रहे थे। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
स्थानीय प्रशासन और सेना का संयुक्त प्रयास
इस अभियान में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बल संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। सुरक्षाबलों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर इलाके में छिपे आतंकियों को खत्म करके ही अभियान को समाप्त करेंगे।
लंबे ऑपरेशन से सुरक्षा बलों की रणनीति पर सवाल नहीं
सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि ऑपरेशन का लंबा खिंचना असफलता नहीं, बल्कि सावधानी का संकेत है। जंगल और गुफाओं में छिपे आतंकियों को खत्म करने के लिए धीमी लेकिन सटीक कार्रवाई की जरूरत होती है, ताकि जवानों का नुकसान कम से कम हो।
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