GST Revamp: केंद्र सरकार वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) में क्रांतिकारी बदलाव की योजना बना रही है। सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार, 15 अगस्त 2025 को बताया कि वित्त मंत्रालय ने जीएसटी परिषद को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें मौजूदा 12% और 28% स्लैब को समाप्त कर केवल दो दरें 5% और 18% लागू करने की सिफारिश की गई है। इस सुधार का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना, उपभोक्ताओं को राहत देना और अर्थव्यवस्था को गति देना है। सूत्रों के अनुसार, 28% स्लैब की 90% वस्तुएं 18% में और 12% स्लैब की 99% वस्तुएं 5% स्लैब में स्थानांतरित होंगी।
GST Revamp: किसानों और स्वास्थ्य क्षेत्र को राहत
प्रस्ताव में किसानों, स्वास्थ्य, और इंश्योरेंस से जुड़े उत्पादों पर कम कर दर रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे टूथपेस्ट, साबुन, और शैंपू 5% स्लैब में आएंगे, जिससे आम उपभोक्ताओं को लाभ होगा। वहीं, तंबाकू, पान मसाला, और सिगरेट जैसे सिन गुड्स पर 40% की विशेष जीएसटी दर लागू होगी, जिसमें केवल 5-7 वस्तुएं शामिल होंगी। रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, और वॉशिंग मशीन जैसे आकांक्षी उत्पादों को इस उच्च दर से बाहर रखा गया है। पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी के दायरे से बाहर रहेंगे। कुल कराधान 88% पर स्थिर रहेगा, और बढ़ते उपभोग से राजस्व नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद है।
GST Revamp: पीएम मोदी का ‘डबल दिवाली’ का वादा
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से अपने 12वें संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी सुधारों को डबल दिवाली का तोहफा बताया। उन्होंने कहा, पिछले आठ वर्षों में जीएसटी ने कर प्रणाली को सरल किया। अब समय है इसकी समीक्षा का। हमने राज्यों के साथ विचार-विमर्श किया और अगली पीढ़ी के सुधार ला रहे हैं। पीएम ने जोर देकर कहा कि यह सुधार आम लोगों और एमएसएमई के लिए कर का बोझ कम करेगा, जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती होंगी और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। उन्होंने इसे समय की मांग करार दिया।
GST Revamp: जीएसटी का सफर और भविष्य
2017 में लागू जीएसटी ने भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे को एकीकृत किया और छोटे-मध्यम उद्यमों के लिए व्यापार को आसान बनाया। वर्तमान में जीएसटी की पांच मुख्य दरें 0%, 5%, 12%, 18%, और 28% हैं। 18% स्लैब से 65% राजस्व, 28% से 11%, 12% से 5%, और 5% से 7% राजस्व प्राप्त होता है। प्रस्तावित सुधारों से 99% वस्तुएं 12% से 5% और 90% वस्तुएं 28% से 18% स्लैब में आएंगी। इससे उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती होंगी और कर विवाद कम होंगे।
GST Revamp: सितंबर में जीएसटी परिषद की बैठक
जीएसटी परिषद की अगली बैठक सितंबर या अक्टूबर 2025 में होगी, जिसमें इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने राज्यों के साथ सहमति बनाने के लिए विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। मंत्रालय का मानना है कि कम दरों से अल्पकालिक राजस्व नुकसान होगा, लेकिन बढ़ी हुई खपत और बेहतर अनुपालन से इसकी भरपाई हो जाएगी। सुधारों में उलट शुल्क संरचना (Inverted Duty Structure) को ठीक करने और जीएसटी पंजीकरण को तकनीक-संचालित बनाकर छोटे व्यवसायों के लिए प्रक्रिया को आसान करने का भी प्रस्ताव है।
जीएसटी में प्रस्तावित दो स्लैब (5% और 18%) और सिन गुड्स के लिए 40% की विशेष दर से कर प्रणाली सरल होगी। यह कदम आम लोगों, किसानों, और एमएसएमई को राहत देगा, साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देगा। पीएम मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन के तहत यह सुधार दीवाली से पहले लागू हो सकता है, जो उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा तोहफा होगा।
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