Supreme Court: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। सतीश कुमार अग्रवाल द्वारा दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग पर निराधार और अपमानजनक आरोप लगाकर एक संवैधानिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस की राजनीतिक दल के रूप में मान्यता रद्द करने और पार्टी के कुछ नेताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
Supreme Court: क्या है याचिका का आधार?
याचिका में दावा किया गया है कि कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ झूठा प्रचार चलाकर इसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी स्थापना के समय भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी, जो प्रतिनिधित्व जनता अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत एक पंजीकृत और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में अनिवार्य है। हालांकि, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित पार्टी के कुछ नेताओं (याचिका में प्रतिवादी नंबर 3 से 5 के रूप में उल्लेखित) द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ चलाया जा रहा कथित अभियान इस शपथ का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह अभियान न केवल संविधान के प्रति निष्ठा को तोड़ता है, बल्कि चुनाव आयोग के वैधानिक और संवैधानिक कार्यों में भी गैरकानूनी हस्तक्षेप करता है।
Supreme Court: मांगें और अनुरोध
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट ऑफ मंडमस (परमादेश) जारी करने की अपील की है। इस याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह कांग्रेस का पंजीकरण रद्द करे। इसके साथ ही, याचिकाकर्ता ने मांग की है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं को संविधान के प्रति निष्ठाहीन घोषित किया जाए। इसके अतिरिक्त, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ कथित तौर पर चलाए जा रहे ‘प्रोपेगेंडा’ की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।
याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग को प्रतिनिधित्व जनता अधिनियम, 1951 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार देशभर में मतदाता सूची तैयार करने और संशोधन करने का विशेष अधिकार प्राप्त है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने आयोग की निष्पक्षता और स्वायत्तता पर सवाल उठाकर इसकी कार्यप्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश की है। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि इस तरह के कृत्य संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और गरिमा के खिलाफ हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा पैदा करते हैं।
याचिकाकर्ता ने इस मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से त्वरित सुनवाई की मांग की है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के खिलाफ निराधार आरोप लगाकर कांग्रेस ने न केवल अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का उल्लंघन किया है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी कमजोर करने का प्रयास किया है।
पहले भी पाटी के खिलाफ दायर की जा चुकी है याचिकाएं
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस या इसके नेताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर की गई है। इससे पहले भी विभिन्न मुद्दों पर पार्टी के खिलाफ याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। उदाहरण के लिए, 2020 में एक याचिका में 2008 में कांग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच कथित गुप्त समझौते की एनआईए जांच की मांग की गई थी। इसके अलावा, 2023 में 14 विपक्षी दलों, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन कोर्ट ने इसे सुनवाई योग्य नहीं माना।
जानिए आगे क्या होगा
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाती है, जो संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और राजनीतिक दलों की जवाबदेही से संबंधित है। यदि कोर्ट इस मामले में सुनवाई के लिए सहमत होता है, तो यह राजनीतिक दलों के आचरण और उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है। फिलहाल, याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख और इसकी सुनवाई की तारीख का इंतजार है।
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